शोल्‍डर वर्कआउट: कंधो को मजबूत करता है ओवर हेड प्रेस एक्‍सरसाइज़

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ओवर हेड प्रेस एक Shoulder workout यानी कंधों की एक्सरसाइज में भांति भूमिका निभाता है। वास्तव में यह फाउंडेशनल और फंक्शनल मूवमेंट है। मतलब यह कि स्क्वैटिंग, जम्पिंग, स्प्रिंटिंग, क्राॅलिंग की ही तरह इससे भी कंधों की मांसपेशियों में प्राकृतिक दबाव पड़ता है और उनका विकास होता है। बहरहाल कंधों के बेहतर विकास के लिए तमाम तरह के एक्सरसाइजों का विकास हुआ है, जिन्हें मौजूदा समय में तमाम बाॅडी बिल्डर्स करते हैं। इनमें वेट लिफ्टिंग, बैठे हुए और खड़े हुए, मिलिटरी शोल्डर प्रेस/मिलिटरी प्रेस/बार्बल शोल्डर/ओवर हेड प्रेस। इन सब एक्सरसाइजों का एक ही मकसद है कंधों का बेहतर विकास।

कंधों के लिए ओवर हेड प्रेस

हमारे कंधों को इस प्रकार की मांसपेशियों में विभाजित किया जा सकता है-
Deltoids: पश्च फाइबर
Deltoids: पूर्वकाल फाइबर
Deltoid: पार्श्व फाइबर

ओवरहेड प्रेस में मुख्यतः फ्रंट डेल्टोइड (एंटेरियर), साइड डेल्टाॅएड (लेटरल) का काम होता है जबकि इसमें पोस्टेरियर डेल्‍टॉएड्स का काम न के बराबर होता है यानी इसमें इसकी भूमिका कम होती है।

टिप्स:

1. ओवरहेड प्रेस के दौरान अपने आंदोलनों पर विशेष ध्यान दें।
2. बैक सपोर्ट पोजीशन में बैठने और खड़े होने के बजाय व्यायाम करने को प्राथमिकता दें।
3. बॉडी बिल्डिंग के शौकीन हैं तो हाइपरट्रॉफी फंडामेंटल लॉ को समझें।

खड़े होने के बजाय, एक बैक सपोर्ट पोजीशन में बैठें। जब आप एक खड़े प्रेस की कोशिश करते हैं, जब पैर का समर्थन किया जाता है तो यह एक कठिन प्रेस के बजाय एक पुश-प्रेस में बदल जाता है। ऑपरेटिंग चेन पैर से शुरू होती है। बल पैरों पर उत्पन्न होता है, जो नितंब तक पहुंच जाती है। इससे नितंब की मांसपेशियों का काफी लाभ पहुंचता है। इसे आप पाॅवर मूव कह सकते हैं। लेकिन इसे हाइपरट्रॉफी कदम कहना सही नहीं होगा। आपको बता दें कि आप इसे आकार के लिए कर रहे हैं।
यदि आपके साथ जिम में कोई उपलब्ध नहीं है, तो Bicep Rod का उपयोग करें। अब वजन उठाएं। लेकिन आप आमतौर पर ऐसा केवल 8 से 10 बार कर सकते हैं। तो इससे ज्यादा मत करो, इससे आपको तकलीफ होती है। पुश अप के साथ अपने आंदोलनों को नियंत्रित करने का प्रयास करें। प्रत्येक सेट में वजन बढ़ाना और अधिक वजन को दबाने की आपकी क्षमता को ध्यान में रखते हुए आपकी गति को नियंत्रित करने की आपकी क्षमता कम हो जाएगी।

कैसे जानें आप हैं सही

यदि आपके कंधे व्यायाम के दौरान तनावग्रस्त हैं, तो पार्श्व और पूर्वकाल में हल्के दर्द होंगे। इसके अलावा, आप जो वजन उठाते हैं वह आपके पक्ष में होता है, इसलिए इस बार आप चौथे या पांचवें सेट तक पहुंच जाएंगे।तब तक आपके कंधे पूरी तरह थकान से भर जाते हैं। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है तो समझें आप सही दिशा की ओर अग्रसर हैं यानी आप सही तरह से एक्सरसाइज कर रहे हैं।

ध्यान दें

अगर आप बॉडी बिल्डिंग के शौकीन हैं तो फंडोमेंटल लॉ ऑफ हाइपरट्रॉफी को समझें। यह है टाइम ए मसल इज पुट अंडर टेंशन। मतलब यह कि आप जितना ज्यादा वक्त देंगे और अपने मसल्स में टेंशन पैदा करेंगे, उतना ही आपके मसल्स के लिए यह लाभकर होगा। हालांकि कई बार अतिरेक में एक्सरसाइज करने से कंधों में दर्द हो जाता है यहां तक कि मसल्स सेल डैमेज भी हो जाती हैं। लेकिन आपको बता दें कि वक्त के साथ-साथ वह अपने आप भर भी जाती है।

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