The Real Stone Boy at Garh Ganesh Temple Part-2

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हैलों दोस्तों मुझे उम्मीद है कि आप सब अच्छे होगे। मुझे बहुत सारे कमेन्ट आये और सभी लोग उस व्यक्ति को जानना चाहते है। मै उस व्यक्ति का नाम मै जरूर बताउगा।

The Real Stone Boy

उस व्यक्ति ने रोजाना जाना शुरू किया और सेवा करने का कार्यक्रम जारी रखा । उन्ही दिनों उसने एक व्यक्ति को देखा जो रोजाना प्रत्थरों को इक्टठा करना करता। न जाने कोनसी ऐसी ललक थी न जाने ये कैसा संकल्प लिया था ऐसा लगता था कि उस व्यक्ति को बचपन से ही प्रत्थरो से प्रेम था। उस व्यक्ति ने जो रोजाना प्रत्थर को इक्टठा करता रहता और उस व्यक्ति को आज हम स्टोन बाय के नाम से जानते है। स्टोन बाॅय का नाम सुनकर आपके दिमाग में एक मजबत कदकाठी वाले इंसान कि छवि आति होगी लेकिन स्टोन बाय एक साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति है जो रोजाना पक्षीयों को दाना डालने के बाद प्रत्थर इक्टठा करता रहता ।

मै आपको बता दू गढ गणेश से एक रास्ता चरण मंदिर और जयगढ की तरफ जाता है। लेकिन वो रास्ता बहुत ही जोखिम भरा था क्योकि वहा पर न तो सिढिया थी और ना ही कोई अच्छा रास्ता था । उस रास्ते से एक बार में केवल एक ही आदमी जा सकता था वो भी बहुत रिस्क लेकर और जब ये बात स्टोन बाय को पता चली तब उसने इस रास्ते को सही करने की ठान ली लेकिन सबसे बड़ी समस्या ये थी कि इतने सारे प्रत्थर कहा से लाये क्योकि वो रास्ता बहुत लंबा था और बहुत उचाई पर था जहा पर एक सामान्य व्यक्ति एक पानी की बोतल ले जाने पर भी थक जाता था लेकिन उस स्टोन बाय को भगवान पर पूरा भरोसा था।

वो रोजाना सुबह पक्षीयों के लिए दाना पानी और भगवान के भजन गाता अपने काम को शुरू करता और अपनी सुबह को सुहानी बनाता उसे पूरा भरोसा था कि एक दिन ये रास्ता जरूर बनेगा । वो व्यक्ति जब स्टोन बाय से मिला और जब उसने ये बात जानी तो और भी खुश हो गया मानो कि जैसे मानो उसे अपनी सुबह का मकसद मिल गया हो।

अब स्टोन बाय अकेला नही बल्कि दोनों मिलकर उस रास्ते को बनाने लग गये। स्टोन बाय की सबसे बडी खास बात ये थी कि उसे न केवल प्रत्थर को तराशना आता था बल्कि उस प्रत्यर को कैसे लगाना है ये उसे बहुत ही अच्छी तरह से आता था। जैसे राम सेतु के समय नल और नीर के फेके हुए प्रत्थर पानी में तैरते थे वैसे ही स्टाने बाय के हाथो से लगाया हुआ प्रत्थर अपनी जगह रूक जाता था मानो प्रत्थर ही स्टोन बाय को इतजार कर रहा हो। स्टोन बाय ने हर एक प्रत्थर को बहुत ही बारीकी से लगाया वो भी बिना सीमेंट और बजरी मानो कि भगवान ने स्टोन बाय को इसी काम के लिए बनाया हो।

Beautiful morning at Garh Ganesh Temple: Part-1

जैसे जैसे समय बीतता गया स्टोन बाय का संकल्प और भी मजबूत होता गया मानो की भगवान भी स्टोन बाय का साथ दे रहे हो। क्योकि अब इस काम मे वो केवल 2 लोग ही नही बल्कि बहुत से लोग साथ देने लगे थे। मै आपको बता दू कि प्रत्थर उपर पहाडी पर होते है जिन्हे नीचे लाना होता था और उस रास्ते को बनाना होता था जो कि किसी भी व्यक्ति के लिए असभव था परन्तु स्टोन बाय के अदम्य साहस और लगन को देखते हुए बहुत से लोगो ने सहायता करना शुरू कर दिया था।

जैसे कि कराते टीम एक और टीम ने भी बहुत सहायता की इसके अलावा बहुत से लोगो ने अपना अपना योगदान दिया। ये सभी लोग सुबह सुबह आते और 1 द्यटा प्रत्थर को इकटठा करते और अपनी सुबह को सुहानी सुबह बनाते। स्टोन बाय रोजाना की तरह इन सभी प्रत्थरों से रास्ता बनाता मानो जैसे चरण मंदिर और गढ गणेश मंदिर के बीच मै पुल बना रहा हो। रोजाना की तरह अपनी सुबह को एक सुहानी सुबह बनाता।

इस कार्य के लिए स्टोन बाॅय का उछेश्य केवल और केवल मानवता की सेवा करना हैऔर अपनी सुबह मानवता के लिए अर्पित कर देते।

करीब 1 वर्ष के बाद वो पुल आज बनकर तैयार और जिस पर रोजाना कई सौ लोग उस रास्ते से आते जाते है और स्टोन बाय की जय जयकार करते। और मुझे खुशी इस बात की भी है कि मै स्टोन बाय के कुछ काम आया। स्टोन बाय ने रास्ते के बीच मे बहुत पेड लगाये ताकि आने जाने वाले लोगो को धूप ना लगे। स्टोन बाय जैसे लोग आज इस दुनिया मै बहुत कम है जो बिना किसी लाभ के ना केवल अपनी अपितु सभी कि सुबह को सुहानी बनाते है।

हम सभी को स्टोन बाय की तरह प्रकृति के लिए कुछ कुछ करना चाहिए।

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